क्रांति मिशन ब्यूरो
देहरादून। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश को 2029 तक नशा मुक्त करने का जो अभियान प्रारम्भ किया गया है उसके अनुरूप उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन पर राज्य नशा मुक्त अभियान और तेजी पकड़ रहा है। इसके अंतर्गत 2029 तक प्रदेश को नशा मुक्त करने का लक्ष्य है। युवाओं को नशे से दूर करने के लिए सभी शिक्षण संस्थाओं को भी 2029 तक नशा मुक्त किया जाएगा।
उत्तराखण्ड उच्च शिक्षा उन्नयन समिति उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक “विकसित भारत” का जो संकल्प लिया है उसमें देश के युवाओं को खोखला बनाने वाली नशे की बुराई को समाप्त करना भी शामिल है। इसके अनुरूप केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश को नशा मुक्त बनाने के लिए 2026-29 के लिए रोडमैप घोषित किया गया है। इस रोडमैप के अनुरूप उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत शिक्षण संस्थाओं, जिनमें स्कूल, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं, को नशे के खिलाफ पहली दीवार मानते हुए छात्र छात्राओं में जागरूकता का अभियान तेजी से शुरू किया गया है। इन शिक्षण संस्थाओं को भी 2029 तक नशा मुक्त किया जाना है। युवाओं में जागृति के लिए उनके साथ बैठकें, शिक्षण संस्थाओं में एंटी ड्रग इकाई के गठन, खेल कूद सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन, काउंसलिंग, महाविद्यालय में नशे के शिकार हो गए छात्र छात्राओं को गोपनीय परामर्श और यहां तक कि उनके उपचार के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं और ड्रग मुक्त क्लब तैयार भी करने की योजना है। इस कार्य में शिक्षण संस्थाओं के अलावा शासन प्रशासन के अधिकारी भी अपना पूरा योगदान प्रदान कर रहे हैं।
शिक्षण संस्थाओं के आस–पास जिन होटलों, दुकानों, पीजी और हॉस्टलों में जहां नशे को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं वे भी सरकारी एजेंसियों के निशाने पर हैं। साथ ही संस्थाओं के प्रधानाचार्यों, कुलपतियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे इस पर दृष्टि रखें। उन्होंने बताया कि राज्य में मा.मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया जा चुका है । इस टास्क फोर्स के पास नशीले पदार्थ पकडने, तस्करों को गिरफ्तार करने आदि के अलावा उनकी अवैध सम्पत्ति को जब्त करने का अधिकार भी है। जिससे उनकी आर्थिकी की कमर तोड़ी जा सकें।













