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दो अवॉर्ड, दो स्टैंडिंग ओवेशन : देहरादून फिल्म फेस्टिवल में हरीश शर्मा की फिल्मों की धूम … ‘आदि कैलाश’ बनी बेस्ट टूरिज्म डॉक्यूमेंट्री, ‘ब्राज़ील इन बनारस’ को बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री अवॉर्ड; डेब्यू म्यूजिक वीडियो ‘लोगों में प्रेम होगा’ ने भी जीता दर्शकों का दिल

क्रांति मिशन ब्यूरो 

देहरादून। प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनो डॉक्युमेंट्री के निर्देशक हरीश शर्मा अभिनेता उत्तराखंड की शान हेमन्त पाण्डेय और पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और फुटबॉल कोच भैरब दत्त उपस्थित थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेमन्त पाण्डेय ने कहा इस तरह की फिल्में बनना जरूरी है हमारे यहां के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए।

हरीश शर्मा ने कहा हम मीडिया के माध्यम से कहना चाहते है कि उत्तराखंड में यहाँ की फिल्मों के लिए अलग से यहाँ का सेंसर बोर्ड होना चाहिये देश में जितने भी राज्य है उनमें अपने राज्य के सेंसर बोर्ड होना चाहिए जिससे सेंसर होने में आसानी रहे। अभी दिल्ली या मुम्बई में सेंसर होने में दो महीने लगते है। उत्तराखंड सरकार को केंद्र सरकार से इस विषय में गंभीरता से कोशिश करनी चाहिए।

आस्था की ऊंचाइयां, फुटबॉल के मैदान का जुनून और इंसानियत को जोड़ता प्रेम का संदेश तीन बिल्कुल अलग विषय, लेकिन तीनों ने दर्शकों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ी।

निर्देशक हरीश शर्मा की तीन रचनाओं ने 11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में न सिर्फ दर्शकों की भरपूर सराहना हासिल की, बल्कि दो प्रतिष्ठित पुरस्कार और दो स्टैंडिंग ओवेशन भी अपने नाम किए।

फेस्टिवल में ‘आदि कैलाश – ए फॉरगॉटन पाथ टू द डिवाइन’ को बेस्ट टूरिज्म डॉक्यूमेंट्री और ‘ब्राज़ील इन बनारस: द भैरब दत्त स्टोरी’ को बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

फेस्टिवल के दौरान जाने-माने अभिनेता हेमन्त पाण्डेय, निर्देशक हरीश शर्मा और अपने दौर के शानदार फुटबॉलर एवं समर्पित कोच भैरब दत्त की मौजूदगी ने माहौल को और खास बना दिया।

‘आदि कैलाश’—पर्दे पर उत्तराखंड की आत्मा

हेमन्त पाण्डेय की प्रभावशाली मौजूदगी वाली ‘आदि कैलाश’ उत्तराखंड की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बेहद संवेदनशीलता से पर्दे पर उतारती है। यह डॉक्यूमेंट्री डॉ. ललित पंत की पुस्तक ‘अजपथों से हिमशिखरों तक’ से प्रेरित है।

हेमन्त पाण्डेय ने फिल्म में अपने प्रभावशाली अभिनय और प्रस्तुति से कहानी को एक अलग गहराई और ठहराव दिया है। उनके लिए ‘आदि कैलाश’ महज एक फिल्म नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों की ओर लौटने का अनुभव भी है।

पाण्डेय ने कहा, “मैं हरीश शर्मा की लगभग हर फिल्म से जुड़ा रहा हूं। हमारा रिश्ता 1987-88 में पिथौरागढ़ से शुरू हुआ था। इतने वर्षों बाद भी वह सिलसिला जारी है और मुझे विश्वास है कि हमेशा जारी रहेगा।

‘आदि कैलाश’ का हिस्सा बनना और वहां शूटिंग करना मेरे लिए अपनी जड़ों में वापस लौटने जैसा था।”
‘
ब्राज़ील इन बनारस’—एक फुटबॉलर की जिंदगी, जो अगली पीढ़ी को समर्पित है।

‘ब्राज़ील इन बनारस: द भैरब दत्त स्टोरी’ सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि फुटबॉल के प्रति जीवनभर के समर्पण की प्रेरक दास्तान है।

लगातार 12 वर्षों तक संतोष ट्रॉफी खेलने वाले भैरब दत्त ने मैदान पर अपनी पहचान बनाने के बाद बनारस में नई पीढ़ी के फुटबॉल खिलाड़ियों को तैयार करना अपना मिशन बना लिया।

फिल्म उनके संघर्ष, अनुशासन, जुनून और खेल के प्रति निस्वार्थ समर्पण को सामने लाती है।

स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया बेहद भावुक रही। लोगों ने भैरब दत्त को घेर लिया, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और भारतीय फुटबॉल तथा युवा खिलाड़ियों के लिए उनके योगदान की दिल खोलकर सराहना की।

फिल्म को मिला बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री अवॉर्ड उनकी इसी अनकही यात्रा का सम्मान बन गया।

‘लोगों में प्रेम होगा’—फेस्टिवल में प्रेम और इंसानियत की आवाज़
हरीश शर्मा के लिए फेस्टिवल की एक और खास उपलब्धि उनका डेब्यू म्यूजिक वीडियो ‘लोगों में प्रेम होगा’ रहा।

यह फेस्टिवल में प्रदर्शित एकमात्र म्यूजिक वीडियो था और दर्शकों ने इसके प्रेम, शांति और मानवता के संदेश को खूब सराहा।

गीत को कविता कृष्णमूर्ति और लकी अली ने अपनी आवाज़ दी है, जबकि इसका संगीत पद्म विभूषण डॉ. एल. सुब्रमण्यम ने दिया है और गीतकार समीर अंजान हैं।

इस तरह एक ही फिल्म फेस्टिवल में हरीश शर्मा की तीन रचनाओं ने आस्था, खेल और प्रेम—तीन बिल्कुल अलग भावनाओं को एक सूत्र में पिरोया। एक ओर हिमालय और आदि कैलाश की आध्यात्मिक दुनिया थी, दूसरी ओर फुटबॉल के लिए पूरा जीवन समर्पित कर देने वाले खिलाड़ी की कहानी और तीसरी ओर समाज को प्रेम और इंसानियत से जोड़ने का संदेश।

अपनी फिल्मों को मिले सम्मान और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्देशक हरीश शर्मा ने कहा “अवॉर्ड मिलना निश्चित रूप से खुशी की बात है, लेकिन जब फिल्म खत्म होने के बाद दर्शक अपनी सीटों से उठकर तालियां बजाते हैं और हमारी कहानियों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तो एक फिल्मकार के लिए उससे बड़ा पुरस्कार कोई नहीं हो सकता।”

दो अवॉर्ड, दो स्टैंडिंग ओवेशन और तीन अलग-अलग कहानियां 11वां देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल हरीश शर्मा और उनकी टीम के लिए यादगार बन गया।