क्रांति मिशन ब्यूरो
देहरादून। 15 सितंबर 2026 से 23 सितंबर 2026 तक सीता राम मंदिर नीबूवाला कोलागढ़ में मनाए जाने वाली मां नंदा सुनंदा महोत्सव का आयोजन कुर्मांचल सांस्कृतिक एवम् कल्याण परिषद गढ़ी कैन्ट शाखा द्वारा आयोजन किया जा रहा है। मां नंदा सुनंदा को देवी नहीं अपनी बेटी माना जाता है कुमाऊं में प्रचलित है कि कुमाऊनी जागरण और बुजुर्गों के अनुसार दो कथाएं प्रचलित हैं
हिमालय की बेटियां हिमवंत और मीना की दो बेटियां बड़ी नंदा और छोटी सुनंदा का विवाह शिव से हुआ और वह कैलाश चली गई छोटी बहन सुनंदा कभी दीदी को अकेले नहीं छोड़ती थीं इसलिए जब नंदा ससुराल में आती है तो सुनंदा सहेली बनकर साथ आती है ,
चंद्र वंश की राजकुमारियां कहते हैं चंद राजाओं के काल में दो राजकुमारियां शिव की अनन्य भक्त थी और उन्होंने अल्मोड़ा में तपस्या कर प्राण त्यागे तभी से चंद्र राजा उन्हें कुलदेवी मानने लगे अल्मोड़ा की नंदा मंदिर की स्थापना 17वीं सदी में रजत चंद्र ने करवाई थी और तब से कुमाऊं की ईस्ट देवी है। इसलिए नंदा को इष्ट देवी और सुनंदा को उनकी सहचरी स्वरूप माना जाता है, जो स्त्री शक्ति और मेहनत का प्रतीक है। मां नंदा सुनंदा को बेटी की तरह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह गणेश उत्सव जैसा नहीं बेटी की विदाई जैसा पर्व है। कदली वृक्ष से जन्म शुक्ल अष्टमी से तीन-चार दिन पहले केले के चार पेड़ों पर अक्षत डालकर चुना जाता है। उसे ही रुई कपड़ा और बांस से दो मूर्तियां बनती हैं। मूर्ति कुर्मासन कछुए के आसन पर बैठी बनती है क्योंकि कुमाऊं का पुराना नाम कुर्वांचल है। अष्टमी को मायके आना अष्टमी के दिन नंदा सुनंदा ससुराल से अपने मायके यानी कुमाऊं की धरती पर पधारी थी ब्रह्म मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा होती है और सभी प्रियजन अपनी बेटी घर आ गई समझते हैं।
तीन दिन की पूजा और फिर विदाई तीन दिन तक झोडा चांचरी भजन कीर्तन होता है, चौथे दिन नैनीताल में नैनी झील में अल्मोड़ा में, कोसी में डोले को विसर्जित किया जाता है। इस विसर्जन को विसर्जन नहीं बेटी की विदाई कहते हैं। जैसे अपनी बेटी को ससुराल विदा करते हैं , आंखों में आंसू लिए। यही है नंदा सुनंदा यात्रा की कहानी जो कुमाऊं की प्रचलित देवी है। इस पूरे कार्यक्रम के राजा रानी जो माँ नंदा सुनंदा के माता-पिता के स्वरूप में राजेंद्र बिष्ट एवं उनकी धर्मपत्नी नंदी बिष्ट रहेंगे।
बबीता साह लोहनी ,कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद के अध्यक्ष कमल रजवार, सचिव गोविंद पांडे, संरक्षक राजेंद्र सिंह बिष्ट, गढ़ी कैन्ट के अध्यक्ष राजेश पंत , के डी जोशी , प्रेमा तिवारी, हरीश चंद पांडे , कमला उप्रेती, कल्पना वर्मा , गणेश कांडपाल, रमा कांडपाल, कमल पटेल, हंसा राणा, पवन डबराल,लक्ष्मण सिंह बिष्ट मनमोहन बटकोरा मीडिया प्रभारी वंदना बिष्ट ,और समस्त पदाधिकारी कार्यकारिणी सदस्य। उपस्थित रहेंगे








