क्रांति मिशन ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। तम्माम दावो के बावजूद केदारनाथ मार्ग पर घोड़े खच्चर की लीद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, ये गंदगी बारीश के पानी के साथ मिलकर मन्दाकनी में जा रही है। प्रदूषण पर्यावरण विभाग, जिला प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है..।
उल्लेखनीय है कि केदारनाथ मार्ग को प्रदूषित कर रही घोड़े खच्चर के लीद को लेकर जिला प्रशासन,पर्यटन विभाग ने तमाम दावे किए कि इस लीद को चीड़ के पिरूल के साथ मिलाकर फायर ब्रिक्स बनाए जाएंगे और उससे पानी गर्म करने के बॉयलर जलेंगे तीर्थ यात्रियों को गर्म पानी मिला करेगा। किन्तु इस योजना से इस यात्रा सीजन में एक बाल्टी गर्म पानी भी यात्रियों को नहीं मिल पाया है।
क्या हुआ प्रोजेक्ट का?
पर्यटन विभाग ने कैबिनेट से पास करवा कर एक पायलट प्रोजेक्ट 3 फरवरी 2026 को हिमालय इंस्टीट्यूट फॉर इनवायरमेंट इकोलॉजी एंड डेवलपमेंट संस्था को 1 करोड़ 43 लाख 61 हजार रु में दे दिया।
जोर शोर से इस प्रोजेक्ट का प्रचार प्रसार किया गया।
लेकिन फरवरी से सितम्बर तक वक्त बीत गया और इस प्रोजेक्ट से पानी गर्म नसीब नहीं हुआ।
नतीजा ये हुआ कि घोड़े खच्चर की लीद यात्रा मार्ग से उठाई नहीं गई और ये गंदगी श्रद्धालुओं के पैरों में लगती रही और बारिश के साथ मिलती हुई गंगा में मिल रही है।
जानकारी मिली है जिस संस्था को ये प्रोजेक्ट दिया गया उसका कोई अनुभव नहीं था, जब जब प्रदूषण कि कोई बात उठती है. घोड़े खच्चरो की लीद उठाकर कट्टो में भर कर एक किनारे छोड़ दी जाती है, अगले दिन पुनः मार्ग गंदे हो जाते है और दस पंन्द्रेह दिनों तक फिर वाही हालात बन जाते है। प्रोजेक्ट साइट पर कभी बिजली न होने से बायलर ना चलने कभी लकड़ी न होने जैसे हालात है, चीड़ पिरुल से फायर ब्रिक्स बनेंगे वो किस चूल्हे में जलेंगे? किसी को पता नहीं क्यूंकि अभी तक ऐसे चूल्हे किसी ने भी देखे तक नहीं.।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा से जब इस प्रोजेक्ट के बारे में पूछा गया तो वो भी इसका सही जानकारी देने से बचते नज़र आये और सिर्फ इतना कह पाए कि ” वर्क इन प्रोग्रेस “।
पहले उठाता था मुफ़्त में
स्मरण रहे कि पिछले साल जिला प्रशासन के आग्रह पर पतंजलि योग पीठ द्वारा यात्रा मार्ग से लीद उठाई जा रही थी और इसके निस्तारण के लिए उनके द्वारा केदारनगरी में एक केंद्र भी स्थापित किया गया जिसमें उनके द्वारा करीब 50 लाख से ज्यादा का खर्चा भवन निर्माण आदि में किया गया। पतंजलि द्वारा ये कार्य एक सेवा के रूप में किया और सरकार से एक रु की मदद भी नहीं ली।
इस बारे में उनका प्रोजेक्ट आगे बढ़ता उससे पहले ही 10 अप्रैल 2026 को रुद्रप्रयाग के जिला पशुपालन अधिकारी आशीष रावत ने उनके प्रोजेक्ट पर काम न करने के तीखे आरोप लगाते हुए नोटिस जारी कर दिया। उल्लेखनीय है कि उक्त काम को फरवरी में ही बिना उनको सूचित किए हिमालय इंस्टीट्यूट फॉर इन्वायरमेंट.. को दे दिया गया था।
इस पर पतंजलि योगपीठ द्वारा पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन को लीगल नोटिस भेजा है और अपने द्वारा खर्च किए हुए काम का हर्जाना मांगा है। बताया जाता है कि लीगल नोटिस से शासन प्रशासन अब असहज की स्थिति में है। जिस संस्थान को पर्यटन विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट दिया है उसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे है कि उक्त संस्था कब बनी किसने बनाई उसके कर्ताधर्ता कौन है? आनन फानन में उसे कैबिनेट ने क्यों लाया गया? और अब तक इस पर काम शुरू क्यों नहीं हुआ ?
यानि जिस गंदगी को निशुल्क उठाने और उसके निस्तारण का काम पतंजलि योगपीठ ने किया अब पर्यटन विभाग ने एक करोड़ चालीस लाख से ज्यादा की रकम कैबिनेट ने जारी करवा दी और लीद फिर भी नहीं उठी।
इस बारेमे डीएम रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि लीद निस्तारण प्रोजेक्ट में कार्रवाई गतिमान है,जिस संस्था को ये प्रोजेक्ट दिया गया वो अभी केदारनाथ क्षेत्र में बॉयलर लगाने के लिए प्रयासरत है।
गंगा प्रदूषण का खतरा
केदारनाथ मार्ग पर करीब चार हजार घोड़े खच्चर चक्कर लगा रहे है, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ( एनजीटी )ने इस पर उत्तराखंड सरकार को , केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार पत्र लिखा है कि घोड़ेखच्चर की लीद से मंदाकिनी गंगा प्रदूषित हो रही है इससे जलीय जीवो को खतरा हो रहा है साथ ही पानी की शुद्धता पर भी असर पड़ रहा है।












