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प्रांत प्रचारक ने संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य तथा स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता—पर विस्तार से प्रकाश डाला
क्रांति मिशन ब्यूरो
देहरादून। आज दिनांक रविवार, 01 फरवरी 2026 को देहरादून महानगर दक्षिण के कई वार्डों में विराट हिंदू सम्मेलन अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इन सम्मेलनों का उद्देश्य सनातन संस्कृति एवं धर्म के मूल्यों को सुदृढ़ करना, सामाजिक एकता एवं समरसता को मजबूती देना तथा हिंदू समाज में जागरण की चेतना को नई दिशा प्रदान करना रहा। सभी वार्डों में हजारों की संख्या में नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं एवं वरिष्ठजनों की सक्रिय सहभागिता ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि संगठित हिंदू समाज ही राष्ट्र और संस्कृति की सशक्त आधारशिला है।
तूनवाला, वार्ड संख्या 68 में आयोजित सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने अपने प्रेरक संबोधन में संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का उल्लेख करते हुए पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य तथा स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदू समाज जाति-पाति से ऊपर उठकर संगठित, संस्कारित एवं राष्ट्रहित में निरंतर सक्रिय बनें, यही वर्तमान समय की आवश्यकता है।
इसी क्रम में वार्ड संख्या 86, सेवला कला (प्रकाश गार्डन) में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ लगभग 1800 से अधिक नागरिकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, तत्पश्चात वंदे मातरम् और सामूहिक हनुमान चालीसा का आयोजन किया गया। छात्रों द्वारा संत शिरोमणि रविदास जी एवं श्री रामचंद्र जी के जीवन पर आधारित प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक भाव से ओतप्रोत कर दिया। इस अवसर पर समाज में विशिष्ट योगदान देने वाली महिला समाजसेविकाओं तथा श्रमशील वर्ग बढ़ई, नाई, शिल्प कलाकार, राज मिस्त्री एवं सफाई कर्मचारी (पर्यावरण मित्र) को सम्मानित कर सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल ने अपने विचारोत्तेजक वक्तव्य में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा तक्षशिला, विक्रमशिला एवं नालंदा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय शिक्षा प्रणाली जाति आधारित नहीं, बल्कि कर्म आधारित थी। उन्होंने टी.एस. एलियट की कविता द वेस्ट लैंड (1922) में उपनिषदों के दार्शनिक प्रभाव का उदाहरण देते हुए उपनिषदों की तीन शिक्षाओं दत्त (दान), दयाध्वम् (करुणा) और दम्यत (संयम) को आधुनिक समाज की नैतिक एवं आध्यात्मिक रिक्तता का प्रभावी समाधान बताया।
वार्ड 87 में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक अध्यक्ष आशीष गौतम एवं वीर रस के कवि दिव्यांशु के ओजस्वी उद्बोधनों ने वातावरण को राष्ट्रभाव से भर दिया, जबकि वार्ड 93 में 1500 से अधिक नागरिकों की सहभागिता रही।
इसी दिन वार्ड 41 (इंदिरापुरम), 38 (पंडितवाड़ी), 39–40 (सीमाद्वार), 37 (वसंत विहार), 42 (कांवली), 79 (क्लेमेंट टाउन) सहित अन्य वार्डों में भी विराट हिंदू सम्मेलन संपन्न हुए।
सभी सम्मेलनों का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। आयोजक मंडल ने समस्त हिंदू समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का जनआंदोलन है, जिसने देहरादून महानगर को यह स्पष्ट संदेश दिया कि संगठित, जागरूक एवं संस्कारित हिंदू समाज ही सशक्त भारत की नींव है।





