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अजीत डोभाल और जनरल बिपिन रावत के अपमान पर कांग्रेस स्पष्ट करे अपना रुख
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कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का हिसाब दे
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महिला सम्मान की बात करने वाले छोटी बच्चियों को धमकाते हैं
क्रांति मिशन ब्यूरो

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में पत्रकारों से वार्ता करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। प्रदेशवासियों के मान-सम्मान और स्वाभिमान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए खटीमा गोलीकांड, मसूरी गोलीकांड और रामपुर तिराहा कांड जैसी घटनाएं हुई थीं। रामपुर तिराहा में माताओं-बहनों के साथ हुए घिनौने कृत्य आज भी उत्तराखंडवासियों की स्मृतियों में जीवित हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का बयान प्रदेशवासियों के पुराने जख्मों को कुरेदने वाला है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की न्याय यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को यात्रा निकालने से पहले अपने शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार, अनियमितताओं, जमीनों की बंदरबांट, पलायन और रोजगार जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को मृतप्राय पार्टी बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता उसकी वास्तविकता भलीभांति जानती है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अनुसूचित जाति और दलित वर्ग के नाम पर झूठा नैरेटिव गढ़ रही है। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण यज्ञ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति या जाति के विरुद्ध नहीं, बल्कि वहां फैलाई गई गंदगी और लगाए गए उन्मादी नारों के संदर्भ में किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 100 से अधिक नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की है और 35,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अंकिता भंडारी प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता पूरे उत्तराखंड की बेटी थी। इस मामले में तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या उसे न्यायालय और न्याय व्यवस्था पर भरोसा नहीं है?
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीति को जिंदा रखने के लिए संवेदनशील मामलों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों को कथित रूप से दी गई धमकियों, सामने आए ऑडियो प्रकरण तथा तंदूर और जैनी कांड का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से अपने शासनकाल की घटनाओं पर भी जवाब देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में जमीन से जुड़े मामलों में आईएएस संवर्ग के अधिकारियों सहित विभिन्न स्तरों पर कठोर कार्रवाई की गई है। नकल माफियाओं और लैंड जिहाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में दंगा रोकने और धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं तथा समान नागरिक संहिता लागू की गई है। मदरसा बोर्ड के स्थान पर नई शिक्षा व्यवस्था के संचालन के लिए प्राधिकरण का गठन भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों को हटाने और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सपूत श्री अजीत डोभाल देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड का गौरव थे, लेकिन उनके लिए ‘गली का गुंडा’ जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस और राहुल गांधी ऐसे बयानों से सहमत हैं?
उन्होंने अखिलेश यादव के बयान पर भी कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के कई नेता स्वयं को सबसे बड़ा साबित करने की होड़ में लगे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जनता के लिए किसी भी राजनीतिक गठबंधन से अधिक महत्वपूर्ण अपने प्रदेश का मान-सम्मान और स्वाभिमान है। राज्य सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए अगले 50 से 100 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सब कुछ समझती है और उत्तराखंड में किसी भी प्रकार के गलत कार्य को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
















