क्रांति मिशन ब्यूरो
हरिद्वार। आम लोगों की भीड़… बिना बैरिकेड की खुली चौपाल… जी हाँ, हरिद्वार में कुछ इसी अंदाज़ में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी जनता के बीच नजर आए। यह कोई औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि जनता की चौपाल थी—जहाँ सत्ता नहीं, बल्कि जनता-जनार्दन का सीधे सूबे के मुखिया से संवाद दिखा।
खाट पर बैठे मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री खाट पर बैठे थे। न कोई दूरी, न कोई दीवार, न कोई सुरक्षा घेरा—लोग सीधे अपने जनसेवक तक पहुँचे। किसी ने राशन की दुकान न खुलने की शिकायत रखी, तो किसी ने यूपीसीएल से जुड़ी समस्या बताई। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी कि जनता की समस्या में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका स्पष्ट संदेश था—जनता ही सर्वोच्च है।
यह पहला अवसर नहीं है जब उनका यह जनसेवक रूप सामने आया हो। बीते एक माह से उनके निर्देश पर पूरे प्रदेश में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। अब तक पाँच लाख से अधिक लोग इन अभियानों से लाभान्वित हो चुके हैं। सरकार स्वयं लोगों के बीच पहुँचकर समस्याएँ सुन रही है और समाधान सुनिश्चित कर रही है।
उत्तरकाशी में भी मुख्यमंत्री स्वयं जनसमूह के बीच पहुँचे और अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए। वहीं सीएम हेल्पलाइन 1905 की बैठकों में वे सीधे दर्ज शिकायतों का फीडबैक लेते नजर आते हैं, ताकि समाधान केवल कागज़ों में नहीं, जमीन पर दिखे।
चाहे धराली आपदा का समय हो या हरिद्वार में आपदा के बाद किसानों के साथ ट्रैक्टर पर बैठकर खेतों का निरीक्षण—हर बार उन्होंने स्वयं को शासक नहीं, बल्कि जनसेवक के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका विजन स्पष्ट है—जनता और सरकार के बीच की दूरी समाप्त करना।
इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज उत्तराखंड में सरकार सचमुच जन-जन के द्वार पर खड़ी दिखाई देती है।








