-
किसी कर्मचारी के निधन पर भी उनके परिजनों (आश्रितों) को सभी तरह के देयकों का भुगतान उसी दिन (Same Day) कराया जाएगा
-
अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, दिल्ली एवं उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख अजय के. मेहरा ने दी जानकारी
-
उत्तराखंड राज्य में 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान तथा 7,74,377 अंशदायी सदस्य हैं, राज्य में सभी दावों का निपटान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है : मेहरा
भुवन उपाध्याय
देहरादून। कर्मचारियों और उनके परिजनों के हित में अच्छी खबर है … कर्मचारी की सेवानिवृत्ति पर उसी दिन (Same Day) सभी तरह के देयकों का भुगतान कराना सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा किसी कर्मचारी के निधन पर भी उनके परिजनों (आश्रितों) को सभी तरह के देयकों का भुगतान उसी दिन (Same Day) कराया जाएगा। यह बात अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, दिल्ली एवं उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख अजय के. मेहरा ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में मीडिया से बातचीत में कही।
प्रेस वार्ता के दौरान अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजय के. मेहरा ने उत्तराखंड क्षेत्र की प्रगति एवं उपलब्धियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड राज्य में लगभग 9,744 अंशदायी प्रतिष्ठान तथा 7,74,377 अंशदायी सदस्य हैं। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि उत्तराखंड में सभी दावों का निपटान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है।
उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यालय हितधारकों को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर रहा है। विशेष रूप से “SAMVEDNA/संवेदना” सेल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह सेल क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य मृत्यु दावों का त्वरित, संवेदनशील एवं त्रुटिरहित निपटान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि “संवेदना” सेल एकल संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करता है तथा EPF, EPS एवं EDLI योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त सभी मृत्यु दावों का व्यवस्थित, कुशल एवं सहानुभूतिपूर्ण ढंग से निपटान सुनिश्चित करता है, जिससे लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संवेदनशील एवं प्रभावी व्यवस्था को पूरे जोन में लागू किया जाएगा, ताकि सभी क्षेत्रों में मृत्यु दावों का त्वरित, पारदर्शी एवं सहानुभूतिपूर्ण निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
अजय के. मेहरा, अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन आधारित योजना (PMVBRY) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी रोजगारोन्मुखी योजना है जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना तथा औपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। विशेष रूप से विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए इसमें अतिरिक्त लाभ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ₹99,446 करोड़ के कुल परिव्यय से दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन का अनुमान है, जिनमें लगभग 1.92 करोड़ युवाओं को, जो पहली बार औपचारिक कार्यबल में प्रवेश करेंगे, लाभ मिलने की संभावना है। यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक सृजित रोजगारों पर लागू होगी।
इसके अतिरिक्त, EPF आंशिक निकासी प्रावधानों के सरलीकरण एवं उदारीकरण के संबंध में जानकारी देते हुए श्री अजय के. मेहरा, अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सदस्यों के ‘Ease of Living’ को बढ़ाने के उद्देश्य से 13 जटिल प्रावधानों को समाहित कर एक सरल एवं सुव्यवस्थित नियम लागू किया है, जिसे तीन श्रेणियों—आवश्यक आवश्यकताएं (जैसे बीमारी, शिक्षा, विवाह), आवास संबंधी आवश्यकताएं तथा विशेष परिस्थितियां—में वर्गीकृत किया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि आंशिक निकासी सीमाओं को भी उदार बनाया गया है, जिसके अंतर्गत शिक्षा हेतु 10 बार तथा विवाह हेतु 5 बार निकासी की अनुमति दी गई है, जबकि पूर्व में विवाह एवं शिक्षा के लिए कुल मिलाकर 3 बार ही आंशिक निकासी की अनुमति थी। इसके अतिरिक्त, सभी प्रकार की आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को घटाकर 12 माह कर दिया गया है। साथ ही सदस्यों के भविष्य निधि खाते में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने हेतु एक प्रावधान भी किया गया है, जिसके अंतर्गत सदस्य के अंशदान का 25% भाग न्यूनतम शेष के रूप में बनाए रखना आवश्यक होगा। इससे सदस्य EPFO द्वारा प्रदत्त उच्च ब्याज दर का फायदा उठाते हुए एक सुदृढ़ सेवानिवृत्ति कोष का निर्माण कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इन प्रावधानों के उदारीकरण से सदस्यों को अपनी तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सुविधा होगी, साथ ही उनके सेवानिवृत्ति बचत एवं पेंशन लाभ सुरक्षित रहेंगे।
अजय के. मेहरा, अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने EPFO के डिजिटल ईको-सिस्टम को सुदृढ़ बनाने हेतु CITES (Centralised IT Enabled System) के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मॉड्यूल प्रक्रियाओं के सरलीकरण एवं स्वचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे दावों के निपटान एवं निकासी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी तथा सेवाएं अधिक पारदर्शी, कुशल एवं तकनीक-आधारित बनेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकताओं में कार्यालय में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण, सदस्यों के दावों का त्वरित निपटान तथा पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करना शामिल है। इसी क्रम में, वेल्हम बॉयज़ स्कूल, देहरादून से संबंधित EDLI Exemption के अंतर्गत कई वर्षों से लंबित प्रकरण का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इस अवसर पर वेल्हम बॉयज़ स्कूल, देहरादून की प्रिंसिपल, Ms. Sangeeta Kain को श्री अजय के. मेहरा, अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त द्वारा EDLI Exemption Order प्रदान किया गया।
इस अवसर पर वी.वी.बी. सिंह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I, उदित साह, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II, मोहम्मद जैद, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II, संतोष कुमार, सहायक भविष्य निधि आयुक्त एवं राजेश कुमार, सहायक भविष्य निधि आयुक्त भी उपस्थित रहे।








