उत्तराखंड से बड़ी खबर : गजब हाल हैं भाई … यूपी में भी वोट और उत्तराखंड में भी, चार मैदानी जनपदों में चौंकाने वाला SIR

0
7

क्रांति मिशन ब्यूरो

देहरादून। SIR को लेकर अब रोज नए नए मुद्दे सामने आ रहे है। जानकारी के अनुसार हजारों मतदाताओं के नाम ऐसे है जोकि यूपी की मतदाता सूची में भी दर्ज है और उत्तराखंड की वोटरलिस्ट में दिखाई दिए है। अब इस बात की चर्चा ये भी सामने आई है कि क्या ऐसे मतदाता यूपी उत्तराखंड में दोनों जगह वोट डालते रहे ?

जानकारी के मुताबिक यूपी से लगी बहुत से विधानसभाएं ऐसी जहां की वोटरलिस्ट में दर्ज नामो को लेकर राजनीतिक दलों में रस्साकशी सी चल रही है,कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी या अन्य कोई सिंडिकेट योजनाबद्ध तरीके से SIR के जरिए फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियां दर्ज करवा रहा है।

ताकि उनके समर्थकों के नाम कटवाए जा सके। कांग्रेस के नेता तिलक राज बेहड़, अनुपमा रावत, हाजी मोहम्मद काजी ने ऐसे सवाल उठाए है कि एक वर्ग विशेष के वोट काटे जा रहे है।
हालांकि बीजेपी ने इसके जवाब में कहा है कि उनके द्वारा उन मतदाताओं पर आपत्तियां लगाई है जोकि मौके पर मौजूद नहीं है। बाकि विषयों से उसका कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ये कहते है कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर घुसपैठियों के वोटों का संरक्षण करती रही है, साफ पारदर्शी मतदाता सूची बनाने का काम निर्वाचन आयोग का है हमारे बीएलए इसमें सहयोग कर रहे है। भट्ट स्पष्ट कहते है कि वोटरलिस्ट में जब फालतू के नाम काटेंगे तभी चुनाव का मत प्रतिशत भी बढ़ेगा।

अब एक खास वर्ग विशेष की वोटो की चिंता कांग्रेस करती है जबकि मतदाता सूची में बहुत से नामों पर निर्वाचन आयोग को संदेह है तो उसपर उन्हें जांच पड़ताल करने का हक है।

जानकारी के मुताबिक उधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून , नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों की मतदाता सूची में ऐसे नाम सॉफ्टवेयर के द्वारा पकड़ में आए है जोकि यूपी की मतदाता सूची में भी है, उल्लेखनीय है कि यूपी बिहार बंगाल के बहुत से लोग ऐसे है जोकि 2003 के बाद रोजगार की तलाश में उत्तराखंड आए और अब यहां की मतदाता सूची में उनके नाम दर्ज है और उनके राज्य की वोटरलिस्ट में भी उनके नाम है।

ये भी जानकारी मिली है कि बिहार बंगाल के पिछले विधान सभा चुनाव में भाग लेने और SIR की प्रकिया उनके राज्य में शुरू होने पर उनके द्वारा अपने राज्यों की वोटर सूची में नाम दर्ज करवा लिए गए है। ऐसे ही यूपी में SIR समाप्त हो चुका है और वहां नाम , ऐसे मतदाताओं ने बरकरार रखे है जोकि उत्तराखंड में भी दर्ज थे।
ऐसे में निर्वाचन आयोग ने ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किए हुए है जोकि कथित रूप से दोनों राज्यों में अभी तक वोट डालते रहे है।

बरहाल अब निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड में मतदाताओं की साफ सूची बनाए जाने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया है और डुप्लीकेट नामों को हटाने का काम भी शुरू कर दिया है।