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विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रभाव, धर्म-संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश … नथुवावाला एवं बालावाला पूर्वी बस्ती में स्वयंसेवकों ने मनाया विजयादशमी उत्सव, नथुवावाला से गुजरावाली तक निकला पथ संचलन

क्रांति मिशन ब्यूरो 

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत लक्ष्मण सिद्ध नगर की नथुवावाला एवं बालावाला पूर्वी बस्ती में परंपरानुसार विजयादशमी उत्सव श्रद्धा, उत्साह एवं राष्ट्रभाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय मुख्य वक्ता तथा डॉ. रामकृष्ण भट्ट कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर महानगर उत्तर के सह-संघचालक राजेंद्र रमोला की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ संघ के परम पवित्र भगवा ध्वज के आरोहण के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रीमान संजय जी, डॉ. रामकृष्ण भट्ट जी एवं श्री राजेंद्र रमोला जी ने मंत्रोच्चारण के बीच शस्त्र पूजन किया। विजयादशमी के पावन अवसर पर शस्त्र पूजन के माध्यम से धर्म, शक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्ररक्षा के संकल्प को अभिव्यक्त किया गया।

विजयादशमी भारतीय संस्कृति, धर्म, राष्ट्रजीवन का प्रतीक

मुख्य वक्ता  संजय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विजयादशमी केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उत्सव नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। समाज अपने-अपने घरों एवं विभिन्न आयोजनों के माध्यम से इस पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य तथा अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है।

उन्होंने सनातन परंपरा में हवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसके आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पक्षों की जानकारी दी। भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में धर्म की स्थापना, मर्यादा की रक्षा और लोककल्याण की भावना का विशेष महत्व रहा है।

संघ की स्थापना का उद्देश्य राष्ट्र का सर्वांगीण उत्थान

संजय जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, उसके उद्देश्यों तथा राष्ट्रजीवन में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयंसेवकों के जीवन में अनुशासन, सेवा, समर्पण, संगठनभाव एवं राष्ट्रनिष्ठा के महत्व को रेखांकित किया। संघ की दैनिक शाखाओं में होने वाले शारीरिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों, देशभक्ति से प्रेरित खेलों तथा योगासनों के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण और सामूहिकता के विकास की प्रक्रिया को भी उन्होंने समझाया।

अपने उद्बोधन में उन्होंने राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की प्रेरणादायी भावना तथा अखंड भारत की संकल्पना का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

पंच परिवर्तन से सशक्त समाज का आह्वान

मुख्य वक्ता ने संघ द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए किए जा रहे पंच परिवर्तन के विषय में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण तथा नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषयों को समाजजीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण एवं सामूहिक प्रयासों से साकार होते हैं।

नथुवावाला से गुजरावाली तक निकला पथ संचलन

कार्यक्रम के पश्चात विजयादशमी के पावन अवसर पर स्वयंसेवकों द्वारा नथुवावाला से गुजरावाली के मुख्य मार्ग पर पथ संचलन निकाला गया। अनुशासन, एकरूपता एवं संगठनभाव से परिपूर्ण इस संचलन के माध्यम से स्वयंसेवकों ने समाज में राष्ट्रनिष्ठा, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिकता का संदेश दिया।

संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित यह विजयादशमी उत्सव भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकात्मता, अनुशासित जीवन एवं राष्ट्रसेवा के संकल्प को सुदृढ़ करने वाला आयोजन रहा।