क्रांति मिशन ब्यूरो
विकास नगर ( देहरादून)। उत्तराखंड में भी मार्च 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसों पर बड़ी कार्रवाई की गई थी. इस दौरान प्रशासन ने कई मदरसों को सील कर ताले लगा दिए थे क्योंकि उनके दस्तावेज़ों में कई खामियां पाई गई थीं और नियमों का उल्लंघन हो रहा था.इन मदरसों में सुधार और दस्तावेज़ पूरे करने के बाद कुछ संस्थानों को कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा खोल दिया गया. इनमें खुशहालपुर स्थित जामिया हसनैन बीन अली मदरसा भी शामिल था. लेकिन अब इस मदरसे को लेकर फिर से कई सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय हिंदू संगठनों का आरोप है कि मदरसे को कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए गलत दस्तावेज बनाए गए और कोर्ट को गुमराह किया गया।
एफिडेविट देने वाले की मौत
हिंदू संगठनों का कहना है कि जिस व्यक्ति के नाम पर कोर्ट में एफिडेविट दिया गया था, उसकी 2023 में ही मृत्यु हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि मृतक के नाम पर दस्तावेज़ पेश करना कानूनी रूप से सही है या नहीं।
मदरसे की भूमि विवादास्पद
जानकारी के अनुसार मदरसा ग्राम समाज की जमीन पर संचालित है, लेकिन दस्तावेज़ों में खसरा नंबर और जमीन का विवरण अलग दिखाया गया है।
यह जानकारी स्थानीय समुदाय और हिंदू संगठनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. उनका कहना है कि जमीन और कानून का उल्लंघन सहन नहीं किया जा सकता.सरकारी भूमि पर ये सरासर अतिक्रमण का मामला है।
स्थानीय हिंदुत्वनिष्ठ संगठन और नागरिक अब जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मदरसे के संचालन की तुरंत जांच की जाए और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए. उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।
क्या कहते है अल्पसंख्यक सचिव
इस मामले की जानकारी मिली है हम इसकी जांच करवा रहे है। मदरसे की सील खोले जाने का विषय अलग है और मदरसों को मान्यता तभी मिलेगी जब वो पंजीकरण संबंधी नियमों को पूरा करेंगे।