नंदा देवी उत्सव : मूर्ति निर्माण हेतु कदली वृक्ष लाए गए … और पढ़ें देवी नंदा के पूजन के संबंध में

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क्रांति मिशन ब्यूरो

देहरादून। कूर्मांचल परिषद गढ़ी शाखा द्वारा आज नंदा देवी उत्सव में प्रथम दिवस पंचमी के दिन नंदा देवी और सुनंदा देवी के मूर्ति निर्माण हेतु कदली वृक्ष लाए गए। मां नंदा सुनंदा चंद वंश के राजाओं की पुत्रियां थीं और राक्षसों से बचने के लिए उन्होंने कदली वृक्ष का ही सहारा लिया था इसलिए नंदा देवी मूर्ति निर्माण हेतु सबसे पहले कदली वृक्ष की आवश्यकता होती है। कुमाऊं में मां नंदा की पूजा का क्रम चंद वंश शासकों के जमाने से माना जाता है।

शाखा सचिव बबीता साह लोहनी ने बताया कि इतिहास के मुताबिक सन् 1670 में कुमाऊं के चंद शासक राजा बाज बहादुर चंद बधाणकोट किले से मां नंदा देवी की स्वर्ण प्रतिमा लाए और उसे यहां मल्ला महल (वर्तमान का कलेक्ट्रेट परिसर अल्मोड़ा) में स्थापित किया। अल्मोड़ा के अलावा बाकी सभी स्थानों पर जहां भी नंदा देवी का उत्सव होता है वहां एक प्रतिनिधि राजा के रूप में बनाया जाने की प्रथा है और उनके द्वारा ही मां नंदा सुनंदा की पूजा की जाती है। बबीता शाह ने बताया कूर्मांचल परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार जी को मां नंदा सुनंदा की पूजा हेतु राजा बनाया गया है उनके द्वारा सबसे पहले कदली वृक्ष की पूजा की गई और उसके बाद वृक्षों को मूर्ति निर्माण के स्थान पर लाया गया।  29 और 30 अगस्त को मूर्ति निर्माण किया जाएगा और 31 अगस्त को मां नंदा सुनंदा देवी की प्राण प्रतिष्ठा और पूजा का कार्यक्रम होगा। आज के कार्यक्रम में कूर्मांचल परिषद गढ़ी शाखा के सभी सदस्यों ने हर्षोल्लास के साथ प्रतिभाग़ किया।

कार्यक्रम में केशव दत्त जोशी, हरिश्चंद्र पांडे, जीसी जोशी,राजेश पंत, पवन डबराल मोहन भंडारी, राकेश कुमार लोहनी, प्रेमा तिवारी, कमला उप्रेती, तनुजा तिवारी, हंसा राणा रेनू शर्मा, मीरा ऐथानी, सपना बिष्ट, हीरा राठौर, बबीता भोज, रानी भंडारी, सीमा जोशी, मोहिनी जोशी, तारा रावत, लक्ष्मी तोमर, सुनीता शर्मा, रेणुका डबराल, भावना जोशी आदि ने प्रतिभाग किया।