भुवन उपाध्याय
देहरादून। कूर्मांचल परिषद प्रेमनगर शाखा द्वारा राघव विहार स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में कुमाऊं में सातूं-आठूं यानि गौरा महेश्वर पर्व धूमधाम से मनाया गया। भारी बारिश भी महिलाओं का उत्साह कम नहीं कर सकी। बरसात में भीगते हुए महिलाओं ने भगवान महेश्वर के डोले को भ्रमण कराया और खूब नृत्य किया।
कुमाऊंनी परिधानों में सजी महिलाओं ने शिव-पार्वती के जीवन पर आधारित लोक गीतों पर खेल झोड़ा, चाचरी लगाए। “खोल दे माता खोल भवानी “, “सोल सोलयानी”, “धनुली कंगी टुटली आफी टूटली ख्वार कटोरिए रोज”, ” ओ मेरी साली पिनालू लगादे”, “सांची बता दे पार्वती भोले तेरा काछना” झोडे़ गाकर खेल लगाए और शिव-पार्वती की जीवन लीला का प्रदर्शन किया।
कूर्मांचल परिषद प्रेमनगर शाखा की सचिव हंसा धामी ने बताया शिव-पार्वती की उपासना के पर्व की शुरुआत बिरूड़ पंचमी से होती है। बिरूड़ (पांच प्रकार के अनाज) भाद्र माह के पंचमी को भिगोये जाते हैं। बिरुड़ पंचमी के दिन साफ तांबे या पीतल के बर्तन में पांच तरह के अनाज को मंदिर के पास भिगोकर रखा जाता है। भिगोये जाने वाले अनाज गेहूं, गहत , गुरुस, उड़द और कलों होते हैं। बर्तन के चारों ओर नौ छोटी-छोटी आकृतियां बनाई जाती हैं। ये आकृतियां गाय के गोबर से बनती हैं। इन आकृतियों में दूब डोबी (लगाई) जाती है। यह पर्व भाद्र महीने की पंचमी से शुरू होता है और पूरे हफ्ते भर चलता है।
किंवदंती है कि मां पार्वती भगवान शिव से नाराज होकर मायके आतीं हैं तो शिवजी उन्हें वापस लेने धरती पर आते हैं। घर वापसी के इस मौके को यहां गौरा देवी के विदाई के रूप में कुमाऊं के पूर्वोत्तर भूभाग महाकाली नदी के दोनों ओर कुमाऊं और पश्चिम नेपाल में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण लोक उत्सव है। सातूं आठौं को धूमधाम से मनाया जाता है।
कूर्मांचल परिषद प्रेमनगर शाखा द्वारा राघव विहार स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में हर वर्ष मनाता आ रहा है जिसमें सभी महिलाएं व पुरुष प्रतिभाग करते हैं। कूर्मांचल सांस्कृतिक परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार ने कहा परिषद का हमेशा प्रयास रहा है कि अपनी पुरातन संस्कृति और सभ्यता को जीवित रखें। इसीलिए पर्व सामूहिक रूप से मनाते हैं।
इस अवसर पर. विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, विधायक की धर्मपत्नी श्रीमती बबीता पंडित, आर्येंद्र शर्मा, भारती पाण्डे, हरी सिंह बिष्ट, भगवान सिंह रावत, पुष्पा भट्ट, हंसा धामी, गंगा देवी, राम सिंह बिष्ट, नरेंद्र धामी, जगदीश बोरा, पुष्पा भट्ट, भूपाल सिंह नेगी , बीरू बिष्ट आदि उपस्थित थे।